Gopal Gupta

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सुनहरे कंगन


ज़िंदगी अपनी आख़री पड़ाव पर  है।
मै अपनी तन्हाई के साथ अकेला बस यूं ही इस विरान घर मे अपनी आख़रीं साँसे गिन रहा हूँ,
ऐसी ही एक बोझिल शाम को जब सूरज ढल रहा था । और मैं उसे ढलते हुए देख रहा था, थक कर चारपाई पे आ कर लेट गया अचानक ही सिरहाने रखे तुम्हारे खत हाथ मे आ गया , और माज़ी की सारी यादें ताज़ा हो गई।
मेरे एक परिचित की शादी मे जाना हुआ था
जहाँ पर मेरी पहली मुलाकत तुम से हुई थी
तुम अपनी सहेलियों की भीड़ मे ख़ामोश सादगी से  खड़ी थी तुम्हारी वही मासूमियत मुझे भा गई
मैने रचना भाभी  से पूछा वो लड़की कौन है जिस ने मिले रंग की ड्रेस पहनी है ,
रचना भाभी- मुस्कुराते हुए बोली ये मेरी  कजिन सिस्टर है बहुत समझदार नेक सीरत ख़ूब सूरत तुम अपना दिल सम्भाल कर रखना कही चोरी न हो जाए,,
मै - संभल कर बोला नहीं भाभी ऐसी कोई बात नहीं है बस यूं ही पूछ लिया आप तो तिल का ताड़ बना रही हो चलते समय उन्होंने मुझे उस का फोन नंबर दिया और कहा दोनो तरफ़ है आग बराबर लगी हुई मैने वो कागज़ का टुकड़ा जेब के हवाले कर दिया  उस के बाद बस में जा कर बैठ गया वापसी के लिए। कुछ समय बाद उस का फ़ोन आया तो मालूम उस  अंकिता है  फिर वो दिन भी आया जब मै और तुम पहली बार मिलने वाले थे मैने इलाहबाद की टिकट बुक कराई और तैयारी शुरू कर दी  जब मै इलाहबाद पहुँचा तो वहाँ प्रयाराज मेला लगा हुआ था जिसे हम दोनों साथ मै इंज्वॉय कर रहे थे तभी मेरी नज़र एक दुकान पर रखे  काँच के सुन्हरे कंगन पर गई मैने अंकिता से कहा  ये कंगन तुम्हारे हाथो मे खूब जचेंगे ये कह कर मैने वो कंगन तुम्हे पहना दिए तुम शर्म से लाल हो गई और अपना चेहरा मेरे सीने मे छिपा लिया और फिर मुलाकातों का मुसलसल सिलसिला चल पड़ा जल्द ही आखरी  हमे मंज़िल भी मिल गई मेरे घर बालो ने तुम्हारे घर जा कर हमारा रिश्ता पक्का कर दिया
आखिर वो दिन भी आ गया जब हम अग्नि को साक्षी मानकर  एक दूसरे के हो गए ज़िंदगी हँसी खुशी  चलने लगी मगर  ये ख़ुशियाँ ज्यादा दिन नहीं रही इन्हे किसी की नज़र लग गई डिलीवरी के समय डॉ:( doctor)   नहीं बचा पाएं तुम्हे तुम इक नन्ही सी जान को मुझे सौप कर अकेला छोड़ कर चली गई तुम्हे याद करके आँखें नम हो गईं यूं लगा जैसे तुम लौट आई और मुझ से पूछ रही हो क्यों जी अपना ध्यान नहीं रख सकते आप क्या हाल बना रखा है मैं यादों के वो पल जी रहा था कि तभी  हवा के तेज झोंके ने मेरा ध्यान तोड़ दिया और वही ला पटका जहाँ से में चला था।
    ।।तुम्हारी याद और मौत का इंतज़ार।।
   
        Gopal Gupta "Gopal"

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4 Comments

Abhilasha Deshpande

13-Aug-2023 10:20 PM

Nice story

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Anjali korde

19-Jul-2023 08:35 PM

Nice

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अदिति झा

17-Jul-2023 12:08 AM

Nice 👍🏼

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